प्रारंभिक परीक्षा के लिए: भौगोलिक सूचना प्रणाली, स्थानिक डेटा, वेक्टर डेटा, रैस्टर डेटा, शहरी नियोजन, पर्यावरण प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, कृषि, अंतरिक्ष अनुसंधान, भुवन, भारत मानचित्र, ग्राम मंच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, IoT, बड़ा डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ओपन-सोर्स GIA, स्वामित्व योजना, राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति (NGP) 2022
मुख्य परीक्षा के लिए: भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS): विभिन्न क्षेत्रों में इसका महत्व, संबंधित चुनौतियां और आगे का रास्ता।
भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) क्या है?
- परिचय:
- भौगोलिक सूचना प्रणाली (Geographical Information System—GIS) एक कंप्यूटर-आधारित प्रणाली है, जिसका उपयोग भौगोलिक रूप से संदर्भित या स्थानिक आँकड़ों (Spatial Data) को एकत्रित करने, संग्रहीत करने, प्रबंधित करने, विश्लेषण करने तथा प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
- यह हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, आँकड़ों और विश्लेषणात्मक उपकरणों को एकीकृत करती है, जिससे स्थान-आधारित जानकारी को समझने तथा प्रभावी निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
- GIS आँकड़ों के प्रकार:
- वेक्टर आँकड़े (Vector Data): भौगोलिक विशेषताओं को बिंदु (Points), रेखाओं (Lines) और बहुभुजों (Polygons) के माध्यम से दर्शाते हैं। इनका उपयोग सड़कों, सीमाओं, स्थानों आदि जैसी भौगोलिक विशेषताओं को प्रदर्शित करने में किया जाता है।
- रास्टर आँकड़े (Raster Data): पृथ्वी की सतह को कोशिकाओं या पिक्सेल के ग्रिड के रूप में प्रदर्शित करते हैं। प्रत्येक कोशिका में तापमान, ऊँचाई, वनस्पति या भूमि उपयोग जैसी विशेषताओं से संबंधित जानकारी होती है।
GIS के अनुप्रयोग क्या हैं?
- शहरी नियोजन:
- GIS का उपयोग कुशल, सतत और डेटा-आधारित शहरी विकास के लिए किया जाता है। यह भूमि उपयोग का मानचित्रण करते हुए क्षेत्रों को आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और मनोरंजक क्षेत्रों में वर्गीकृत करने में सहायता करता है।
- यह जनसंख्या वितरण, भू-भाग और मौजूदा उपयोगिताओं का विश्लेषण करके बुनियादी ढाँचे की योजना बनाने में सहायता करता है। इससे सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जल निकासी, सीवेज नेटवर्क और अन्य शहरी सुविधाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
- पर्यावरण प्रबंधन:
- GIS प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह उपग्रह चित्रों के माध्यम से वन क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों का विश्लेषण करके वनों की कटाई की निगरानी में सहायता करता है।
- GIS का उपयोग वायु, जल और मृदा प्रदूषण की निगरानी में भी किया जा सकता है, जिसमें प्रदूषण के स्रोतों और उनके स्थानिक प्रसार का मानचित्रण किया जाता है।
- यह वन्यजीव एवं जैव-विविधता प्रबंधन में आवास क्षेत्रों, प्रवास मार्गों, पारिस्थितिक क्षेत्रों और मानव अतिक्रमण के मानचित्रण द्वारा सहायता करता है।
- आपदा प्रबंधन:
- GIS आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों—रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति—में उपयोगी है।
- यह ऊँचाई, वर्षा, जल निकासी और जलवैज्ञानिक आँकड़ों को एकीकृत करके बाढ़ जोखिम मानचित्रण में सहायता करता है।
- भूकंप जोखिम के आकलन में GIS के माध्यम से भ्रंश क्षेत्रों, संवेदनशील बुनियादी ढाँचे और प्रभावित आबादी का मानचित्रण किया जा सकता है।
- आपदा के दौरान GIS निकासी योजना, राहत शिविरों की पहचान, मार्ग निर्धारण और राहत कार्यों के समन्वय में सहायता करता है।
- कृषि:
- GIS स्थान-आधारित और डेटा-आधारित निर्णयों के माध्यम से उत्पादक एवं सतत कृषि को बढ़ावा देता है।
- यह परिशुद्ध कृषि (Precision Farming) में फसल की स्थिति, मृदा की दशा, सिंचाई की आवश्यकता और भूमि की विशेषताओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है।
- स्थानिक मृदा विश्लेषण से उर्वरता, नमी, pH और पोषक तत्वों की आवश्यकता में होने वाले अंतर की पहचान की जा सकती है।
- GIS कीट एवं रोग प्रकोप की निगरानी में भी सहायता करता है, जिससे समय पर और लक्षित कृषि हस्तक्षेप संभव होता है।
- अंतरिक्ष अनुसंधान:
- GIS अंतरिक्ष अनुसंधान में विशेष रूप से मानचित्रण, स्थानिक विश्लेषण और मिशन नियोजन के लिए महत्वपूर्ण उपकरण है।
- यह चंद्रमा और मंगल जैसे खगोलीय पिंडों के विस्तृत स्थानिक मानचित्र तैयार करने में सहायता करता है।
- GIS-आधारित विश्लेषण से अन्वेषण एवं लैंडिंग मिशनों के लिए सुरक्षित तथा वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की जा सकती है।
- सुदूर संवेदन (Remote Sensing) के साथ GIS का एकीकरण पृथ्वी तथा बाह्य-स्थलीय भू-दृश्यों के अध्ययन को अधिक प्रभावी बनाता है।
GIS अन्य प्रौद्योगिकियों के साथ कैसे एकीकृत होता है?
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग: GIS को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के साथ एकीकृत करके स्थानिक विश्लेषण और पूर्वानुमान क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।
- पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण: AI ऐतिहासिक भू-स्थानिक आँकड़ों का विश्लेषण करके शहरी विस्तार, भूमि उपयोग में परिवर्तन, पर्यावरणीय परिस्थितियों और जलवायु पैटर्न से संबंधित संभावित प्रवृत्तियों की पहचान कर सकता है।
- चित्र वर्गीकरण: ML एल्गोरिदम भूमि विशेषताओं का वर्गीकरण, उपग्रह चित्रों में परिवर्तनों की पहचान तथा जटिल भू-स्थानिक आँकड़ों से उपयोगी जानकारी प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
- रियल-टाइम डेटा संग्रहण: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) को GIS के साथ एकीकृत करने से वास्तविक समय में निगरानी और स्थानिक विश्लेषण संभव होता है।
- सेंसर और GPS-सक्षम प्रणालियों जैसे IoT उपकरण लगातार स्थान-आधारित डेटा उत्पन्न करते हैं, जिन्हें GIS प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्मार्ट सिटी, पर्यावरण निगरानी, कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए प्रदर्शित एवं विश्लेषित किया जा सकता है।
- बिग डेटा: आधुनिक भू-स्थानिक प्रणालियाँ अत्यधिक बड़े डेटा सेट उत्पन्न करती हैं। बिग डेटा प्रौद्योगिकियाँ ऐसे डेटा को संग्रहित, संसाधित और विश्लेषित करने में सहायता करती हैं, जिन्हें पारंपरिक GIS प्रणालियों के लिए संभालना कठिन हो सकता है।
- GIS और बिग डेटा का एकीकरण बड़े पैमाने के स्थानिक डेटा सेट से उपयोगी जानकारी प्राप्त करने तथा बेहतर योजना और निर्णय-निर्माण में सहायता करता है।
भारत में GIS से संबंधित सरकारी पहल कौन-सी हैं?
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राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति (NGP) 2022: इसका उद्देश्य भारत के भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में भू-स्थानिक डेटा और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना है।
- यह भू-स्थानिक अवसंरचना, कौशल, मानकों, ज्ञान और व्यवसायों के विकास पर केंद्रित है।
- SVAMITVA योजना: इसमें ड्रोन सर्वेक्षण और GIS-आधारित मानचित्रण का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के दस्तावेजीकरण और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए किया जाता है।
- इसका उद्देश्य संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों में सुधार, विवादों में कमी, वित्तीय पहुँच में सहायता और ग्रामीण नियोजन को मजबूत करना है।
- सटीक स्थानिक मानचित्रण के लिए CORS तकनीक और ड्रोन सर्वेक्षण का उपयोग किया जाता है।
- भुवन (Bhuvan): ISRO द्वारा विकसित भुवन भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपग्रह चित्रों और भू-स्थानिक जानकारी तक पहुँच प्रदान करता है।
- यह विकास नियोजन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी, संसाधन मानचित्रण तथा अन्य भू-स्थानिक अनुप्रयोगों में सहायता करता है।
- भारत मैप्स (Bharat Maps): राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित बहु-स्तरीय GIS प्लेटफॉर्म, जो ई-गवर्नेंस, डिजिटल मानचित्रण और स्थान-आधारित बुनियादी ढाँचा नियोजन में सहायता करता है।
- SOI ऑनलाइन मैप्स एवं डेटा पोर्टल: सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा विकसित यह पोर्टल स्थलाकृतिक मानचित्र, विषयगत मानचित्र, भू-स्थानिक डेटा सेट और डिजिटल मानचित्रण संसाधन उपलब्ध कराता है।
- सारथी (Sarthi): यह एक वेब GIS प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्थानिक विश्लेषण और सूचित निर्णय-निर्माण के लिए इंटरैक्टिव भू-स्थानिक उपकरण एवं विज़ुअलाइज़ेशन सुविधाएँ प्रदान करता है।
- ग्राम मंचित्र (Gram Manchitra): पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित GIS-आधारित प्लेटफॉर्म, जो पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) द्वारा स्थानिक नियोजन और स्थानीय स्तर के विकास नियोजन को मजबूत करने में सहायता करता है।
- भारत का भू-स्थानिक ऊर्जा मानचित्र (Geospatial Energy Map of India): नीति आयोग और ISRO के सहयोग से विकसित यह GIS-आधारित प्रणाली भारत के ऊर्जा संसाधनों और ऊर्जा अवसंरचना का स्थानिक दृश्य प्रस्तुत करती है।
- यह ऊर्जा क्षेत्र की योजना, नीति निर्माण, अवसंरचना आकलन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन में सहायता करती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा : पूर्व वर्ष प्रश्न (PYQ)
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
प्रश्न 1. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के संदर्भ में, हाल ही में समाचारों में रहा “भुवन (Bhuvan)” क्या है? (2010)
(a) दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ISRO द्वारा प्रक्षेपित एक लघु उपग्रह
(b) चंद्रयान-II के लिए अगले मून इम्पैक्ट प्रोब को दिया गया नाम
(c) भारत की 3D इमेजिंग क्षमताओं वाला ISRO का एक भू-पोर्टल
(d) भारत द्वारा विकसित एक अंतरिक्ष दूरबीनउत्तर: (c)
मुख्य परीक्षा (Mains)
प्रश्न 2. अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर चर्चा कीजिए। इस प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग ने भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायता की है? (2016)