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Sept. 21, 2026

महत्वपूर्ण रिपोर्टों का सारांश

विश्व बैंक की गरीबी एवं समानता संक्षिप्त रिपोर्ट

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए:

गरीबी एवं समानता संक्षिप्त रिपोर्ट (PEBs), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty), गिनी सूचकांक (Gini Index)

मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए:

भारत में गरीबी – कारण, संबंधित सरकारी योजनाएँ एवं आगे की राह।


चर्चा में क्यों?

विश्व बैंक द्वारा अप्रैल 2025 में जारी Poverty and Equity Briefs (PEBs) भारत में अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) में उल्लेखनीय कमी को दर्शाती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा 2.15 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से कम आय पर जीवन-यापन करने वाली भारत की आबादी का अनुपात 2011–12 में 16.2% से घटकर 2022–23 में 2.3% रह गया।

इस अवधि में अनुमानतः 17.1 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए।


गरीबी और समानता संक्षेप (PEBs) क्या हैं?

  • परिचय: PEBs विश्व के 100 से अधिक विकासशील देशों में गरीबी, असमानता (Inequality) और साझा समृद्धि (Shared Prosperity) से संबंधित जानकारी एवं प्रवृत्तियों को प्रस्तुत करती हैं।

  • इन्हें वर्ष में दो बार विश्व बैंक और IMF की Spring तथा Annual Meetings के दौरान जारी किया जाता है।

गरीबी के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक

विश्व बैंक राष्ट्रीय गरीबी रेखाओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय आय-आधारित मानकों का भी उपयोग करता है:

  • 2.15 डॉलर/दिन – अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा

  • 3.65 डॉलर/दिन – निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा

  • 6.85 डॉलर/दिन – उच्च-मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा

भारत के लिए प्रयुक्त आँकड़े

भारत के लिए विश्व बैंक के गरीबी अनुमानों में 2011–12 के उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Consumption Expenditure Survey) तथा 2022–23 के Household Consumption Expenditure Survey से प्राप्त उपभोग संबंधी आँकड़ों का उपयोग किया गया है।


World Bank PEBs के प्रमुख निष्कर्ष

1. ग्रामीण एवं शहरी अत्यधिक गरीबी में कमी

2011–12 से 2022–23 के बीच अत्यधिक गरीबी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई:

  • ग्रामीण क्षेत्र: 18.4% → 2.8%

  • शहरी क्षेत्र: 10.7% → 1.1%

ग्रामीण और शहरी गरीबी के बीच का अंतर भी 7.7 प्रतिशत अंक से घटकर 1.7 प्रतिशत अंक रह गया।


2. निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी

3.65 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर:

  • भारत की कुल गरीबी 61.8% से घटकर 28.1% हुई।

  • लगभग 37.8 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए।

  • ग्रामीण गरीबी: 69% → 32.5%

  • शहरी गरीबी: 43.5% → 17.2%


3. प्रमुख राज्यों का योगदान

भारत के पाँच सर्वाधिक आबादी वाले राज्य—

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश

—2011–12 में भारत के अत्यधिक गरीब लोगों में लगभग 65% का योगदान करते थे।

2022–23 तक:

  • इन राज्यों ने अत्यधिक गरीबी में हुई कुल कमी में लगभग दो-तिहाई योगदान दिया।

  • इसके बावजूद, 2022–23 में भारत के अत्यधिक गरीब लोगों में लगभग 54% इन्हीं राज्यों में रहे।

निष्कर्ष: गरीबी में व्यापक कमी आई है, लेकिन इसका क्षेत्रीय वितरण अभी भी असमान है।


4. बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty)

गरीबी केवल आय की कमी तक सीमित नहीं है। बहुआयामी गरीबी में शिक्षा और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच जैसे गैर-मौद्रिक आयाम भी महत्वपूर्ण हैं।

गैर-मौद्रिक गरीबी में कमी:

53.8% (2005–06) → 16.4% (2019–21) → 15.5% (2022–23)

भारत का उपभोग-आधारित गिनी सूचकांक (Gini Index) भी:

28.8 (2011–12) → 25.5 (2022–23)

रहा, जो मापी गई उपभोग असमानता में कमी को दर्शाता है।

Gini Index – त्वरित पुनरावलोकन

  • 0 → पूर्ण समानता

  • 100 → पूर्ण असमानता

गिनी सूचकांक किसी अर्थव्यवस्था में व्यक्तियों या परिवारों के बीच आय अथवा उपभोग के वितरण में असमानता की मात्रा को मापता है।


रोजगार एवं श्रम बाजार की प्रवृत्तियाँ

गरीबी में स्थायी कमी के लिए रोजगार एवं आय के अवसरों का विस्तार महत्वपूर्ण है।

  • शहरी बेरोजगारी दर FY 2024–25 की पहली तिमाही में 6.6% रही।

  • ग्रामीण महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है।

  • विशेषकर ग्रामीण श्रमिकों और महिलाओं के बीच स्वरोजगार (Self-employment) का महत्व बढ़ा है।

  • महिलाओं की रोजगार भागीदारी अभी भी पुरुषों की तुलना में काफी कम है।

  • युवा बेरोजगारी 13.3% रही, जबकि स्नातकों में यह लगभग 29% तक दर्ज की गई।

  • गैर-कृषि क्षेत्र में केवल लगभग 23% वेतनभोगी रोजगार औपचारिक (Formal) था, जबकि कृषि रोजगार मुख्यतः अनौपचारिक बना हुआ है।

अतः: गरीबी कम करने के लिए केवल आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; उत्पादक, सुरक्षित और औपचारिक रोजगार का विस्तार भी आवश्यक है।


भारत में गरीबी के प्रमुख कारण

1. आर्थिक असमानता

आय, संपत्ति, शिक्षा और अवसरों तक असमान पहुँच के कारण समाज के कमजोर वर्ग आर्थिक विकास का समान लाभ नहीं उठा पाते।

2. सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्करण

महिलाएँ, वंचित समुदाय तथा दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुँच में विभिन्न बाधाओं का सामना कर सकते हैं।

3. लैंगिक असमानता

महिलाओं की कम श्रम-बल भागीदारी, वेतन में अंतर तथा आर्थिक संसाधनों तक असमान पहुँच गरीबी को बढ़ा सकती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीबी के जोखिम को बढ़ाती है।

4. युवा बेरोजगारी

युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार अवसरों की कमी आय सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को सीमित कर सकती है।

PLFS 2023–24 के अनुसार, सामान्य स्थिति (Usual Status) के आधार पर 15–29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 10.2% थी।

5. बुनियादी अवसंरचना की कमी

निम्नलिखित सुविधाओं तक सीमित पहुँच गरीबी के चक्र को मजबूत कर सकती है:

  • गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ

  • शिक्षा

  • सुरक्षित पेयजल

  • स्वच्छता

  • आवास

  • परिवहन

  • डिजिटल कनेक्टिविटी


गरीबी उन्मूलन से संबंधित प्रमुख सरकारी पहल

भारत में गरीबी के विभिन्न आयामों को संबोधित करने वाली प्रमुख योजनाएँ हैं:

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM)

  • प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G)

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY)

  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS)

इन योजनाओं का उद्देश्य आजीविका, आवास, सामाजिक सुरक्षा, पोषण और रोजगार जैसे गरीबी के विभिन्न आयामों को संबोधित करना है।


आगे की राह (Way Forward)

1. महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा

शिक्षा, कौशल, ऋण, उद्यमिता और रोजगार तक महिलाओं की पहुँच बढ़ाकर उनके आर्थिक सशक्तीकरण को मजबूत किया जा सकता है।

2. समावेशी विकास को बढ़ावा

कमजोर एवं वंचित वर्गों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।

3. ग्रामीण रोजगार एवं कौशल विकास का विस्तार

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) जैसे कौशल कार्यक्रमों के साथ ग्रामीण उद्यमिता एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

4. बुनियादी अवसंरचना में सुधार

स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, आवास, परिवहन और डिजिटल अवसंरचना में निवेश गैर-आय आधारित गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

5. गरीबी मापन में सुधार

नियमित एवं तुलनीय घरेलू सर्वेक्षण, बेहतर डेटा कवरेज तथा बहुआयामी गरीबी संकेतकों का उपयोग साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को मजबूत कर सकता है।


निष्कर्ष

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मौद्रिक तथा बहुआयामी गरीबी दोनों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।

हालाँकि, गरीबी का आकलन केवल आय-आधारित गरीबी रेखा से नहीं किया जाना चाहिए। रोजगार की गुणवत्ता, क्षेत्रीय असमानताएँ, लैंगिक अंतर, बुनियादी सेवाओं तक पहुँच और आर्थिक असमानता भी समावेशी विकास के महत्वपूर्ण आयाम हैं।

भारत के लिए आगे की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि गरीबी में कमी के साथ-साथ उत्पादक रोजगार, मानव पूंजी का विकास और अवसरों तक समान पहुँच भी सुनिश्चित हो।


UPSC Civil Services Examination – Previous Year Questions

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)

प्रश्न: ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव द्वारा UNDP के सहयोग से विकसित बहुआयामी गरीबी सूचकांक में निम्नलिखित में से किन पहलुओं को शामिल किया जाता है? (2012)

  1. परिवार के स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, परिसंपत्तियों और सेवाओं से वंचितता

  2. राष्ट्रीय स्तर पर क्रय शक्ति समता (PPP)

  3. राष्ट्रीय स्तर पर बजट घाटे और GDP वृद्धि की सीमा

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

मुख्य परीक्षा (Mains)

प्रश्न 1. निरंतर उच्च आर्थिक वृद्धि के बावजूद भारत मानव विकास के निम्न संकेतकों से जूझ रहा है। उन मुद्दों की विवेचना कीजिए जो संतुलित एवं समावेशी विकास को कठिन बनाते हैं। (2016)

प्रश्न 2. प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधारों की वकालत की है। उनकी स्थिति एवं कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आपके सुझाव क्या हैं? (2016)

प्रश्न 3. गरीबी और कुपोषण एक दुष्चक्र का निर्माण करते हैं, जो मानव पूंजी निर्माण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए कौन-से कदम उठाए जा सकते हैं? (2024)



GYANSHILA IAS – परीक्षा फोकस

UPSC/BPSC के लिए:

इस विषय को गरीबी, समावेशी विकास, मानव विकास, रोजगार, असमानता, सामाजिक न्याय, सरकारी योजनाओं एवं सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़कर पढ़ें।

उत्तर लेखन के प्रमुख Keywords:

बहुआयामी गरीबी • समावेशी विकास • मानव पूंजी • सामाजिक सुरक्षा • रोजगार • असमानता • वित्तीय समावेशन • लैंगिक समानता • क्षेत्रीय असमानताएँ

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